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  • Written By: Admin
  • Published: September 01, 2026 02:52 PM IST
राज्य

किमाणा-दानकोट में खिसक रही जमीन, कई मकानों में पड़ीं दरारें

रुद्रप्रयाग। बसुकेदार तहसील क्षेत्र के किमाणा-दानकोट गांव में लगातार हो रहे भूधंसाव और भूमि कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जगह-जगह जमीन खिसकने से कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। वहीं गोशालाओं और शौचालयों को भी नुकसान पहुंचा है। वर्षों की मेहनत से तैयार की गई उपजाऊ कृषि भूमि भी भूधंसाव की चपेट में आ रही है। इससे ग्रामीणों के सामने जहां अपने आशियानों की सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है, वहीं कृषि भूमि के नुकसान से आर्थिक परेशानियां भी बढ़ने लगी हैं। लगातार बिगड़ती स्थिति से ग्रामीणों में भविष्य को लेकर भय का माहौल है।
राजस्व विभाग की टीम ने किया निरीक्षणरू समस्या की जानकारी मिलने पर रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी प्रदीप थपलियाल किमाणा-दानकोट पहुंचे और आपदा प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और भूधंसाव से हुए नुकसान की जानकारी ली। ग्रामीणों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने प्रशासन को इसकी सूचना दी, जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
किमाणा-दानकोट क्षेत्र में भूधंसाव के साथ सड़क की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जखोली-भीरी मोटर मार्ग पर बिनोबा धार बैंड से किमाणा-दानकोट तक कई स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त है। आपदा के कारण मार्ग के कई हिस्से प्रभावित होने से ग्रामीणों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। इससे क्षेत्रवासियों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रदीप थपलियाल ने लोक निर्माण विभाग से सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों का तत्काल उपचार कर यातायात सुचारु करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर अस्थायी खानापूर्ति के बजाय वैज्ञानिक तरीके से स्थायी उपचार किया जाना जरूरी है. यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रदीप थपलियाल ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को केवल निरीक्षण और कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रशासन और संबंधित विभागों को धरातल पर ठोस कार्रवाई करते हुए सड़क, पेयजल और सुरक्षा से जुड़े कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने होंगे। भूधंसाव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और प्रभावी उपचार जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।

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