देहरादून। प्राकृतिक सौंदर्य, योग और धार्मिक पर्यटन के लिए विश्व विख्यात देवभूमि उत्तराखंड अब साहित्यिक पर्यटन का एक नया और वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है। प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक विरासत, लोक-संस्कृति और कालजयी रचनाकारों की स्मृतियों को सहेजने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। इसके तहत राज्य में दो मॉडल साहित्य ग्राम स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जो देश-विदेश के साहित्यशास्त्रियों, शोधकर्ताओं, लेखकों और पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।इसके साथ ही राज्य सरकार प्रदेश के बिखरे, पांडुलिपियों के रूप में दबे और अब तक अप्रकाशित साहित्य के डिजिटल संरक्षण और प्रकाशन को लेकर भी पूरी तरह गंभीर है।राज्य सरकार की योजना के अनुसार, उत्तराखंड के दो प्रमुख क्षेत्रों - गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक साहित्य ग्राम विकसित किया जाएगा। कुमाऊं में कौसानी (प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली), रामगढ़ (महादेवी वर्मा की कर्मभूमि), और मसूरी (रस्किन बॉन्ड व प्रसिद्ध कवियों की लेखनी का केंद्र) जैसे स्थलों की समृद्ध परंपरा को इन साहित्य ग्रामों के माध्यम से संजोया जाएगा। इन साहित्य ग्रामों में समृद्ध डिजिटल व भौतिक पुस्तकालय, लेखकों के लिए राइटर्स रेजीडेंसी, कार्यशाला कक्ष, पांडुलिपि संग्रहालय और ओपन-एयर थिएटर विकसित किए जाएंगे। यहाँ आकर लेखक पौराणिक साहित्य से भी रू-ब-रू हो सकेंगे।






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