पिथौरागढ़। थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर झकेला नाले ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। तेज बहाव और लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है। फिलहाल ये मार्ग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पिथौरागढ़ का ला झकेला नाला स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ एक सामान्य बरसाती नाला नहीं है इसके साथ एक ऐसी दर्दनाक याद जुड़ी है जिसे यहां के लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं। 7-8 अगस्त 2009 को इस क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई थी। बादल फटने और अचानक आए तेज पानी के चलते बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गये थे। तब करीब दो दर्जन लोगों की जान चली गई थी। उस आपदा की तस्वीरें और घटनाएं आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में हैं। यही वजह है कि जब भी बारिश के बीच ला झकेला नाला अचानक उफान पर आता है लोगों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है।
उत्तराखंड में इस समय मौसम का मिजाज बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। एक तरफ चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में पानी और मलबा घुसने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। दूसरी तरफ पिथौरागढ़ में लगातार बारिश ने नदी-नालों को उफान पर है। दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं लेकिन एक बात समान है कि पहाड़ों पर मौसम का अचानक बदलता मिजाज बड़ी परेशानियां खड़ी कर सकता है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेन्द्र महरा ने कहा फिलहाल रोड बंद है। लगातार बारिश हो रही है। अभी कोई जानमाल नुकसान की खबर नहीं है। कुछ लोग इसे खुद से ही बादल फटना बता रहे है जबकि ऐसा नहीं है। हमारी टीम मौके पर जा रही है।






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